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कांग्रेस का शासन, भाषण रिजल्ट देश का विभाजन ?

कांग्रेस शासन में हो या कहीं भाषण दे रही हो रिजल्ट देश का विभाजन ही होता है चाहे ओ धर्म का हो , भूमि का हो या जाती का हो ।

शुक्रवार 22 जून 2018, कांग्रेस ने आजादी के बाद के शासन में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक विकास के रूप में विभाजन ही करती आई है । क्या कांग्रेस शासन करने की योग्यता नहीं रखती ? कांग्रेस के मस्तिक पर जरा सा बोझ पड़ते ही बंटवारा हो जाता है आखिर क्यों?

 

समय में बहुत पीछे न जाकर राज्यसभा चुनाव में देखें तो कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी कुछ समय के लिए हिंदुत्व में बदल गए। मतलब  हिन्दू बनकर वोट हाशिल हो जाये फिर कौन पूछता है मंदिर को और मुस्लिम, बौद्ध, जैन, क्रिस्टियन , सिख इनकी  कोई वैल्यू नहीं है  ।

 

कर्णाटक में हार का बोझ दिखा तो हिन्दू धर्म बांटकर लिंगायत धर्म बना दिया। मतलब एक और बंटवारा । कर्नाटक में बहुमत हाशिल न कर पाए तो देश बचाने चल दिए गठबंधन करके । अब धर्म से बहुमत नहीं मिला तो जाति पर आ गए । पिछड़ा वर्ग की महारैली निकलने की बात करने लगे । बाकी जातियों का क्या ? पूरा गाँधी परिवार देश के आज़ादी के बाद लगातार ऐसा उद्धार किया कि दलित दलित ही रह गया और किसान आज तक परेशान ।

मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान की दावत खाने रोज़ जायेंगे और कश्मीर की आवासीय पंडितों को आतंकवादी बताएँगे । 

पाकिस्तान के दिमाग पर बॉर्डर अटैक का बोझ क्या पड़ा POk बना दिया । अब कश्मीर में सेना आतंकवाद को खत्म करने में जुटी है तो फिर कांग्रेस की आवाज़ कश्मीर को करो आज़ाद । कांग्रेस की हालत आज ऐसी है की निर्दलीय भी कई चुनाव में उससे ज्यादा सीटें हाशिल की हैं । जब कांग्रेस की मानसिकता देश हित में है ही नहीं तो देश की जनता इन्हे देश बचाने का हक़ कैसे दे देती हैं ?

 

कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह की बुद्धि आरएसएस में आतंकवादी दीखते हैं और कश्मीर में जो हिंदुस्तान का खाकर पत्थर बरसा रहे हैं ओ पंडित हैं । कांग्रेसी नेता गुलाम नवी आज़ाद, आज़ादी की बाद से कश्मीर में कितना रुपया केंद्र ने खर्च किया होगा इनको तो पता ही होगा आखिर अब तक शासन में रहें हैं फिर न जाने कश्मीर में कौन सा विकास कर दिया की आज़ादी चाहिए ?

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