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सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक का फैसला महिलाओं के पक्ष में

सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक का फैसला महिलाओं के पक्ष में

सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक का फैसला महिलाओं के पक्ष में दिया है। उच्चतम न्यायालय के इस ऐतिहासिक निर्णय का सभी ने स्वागत किया गया है। तीन तलाक की प्रथा इस्लामिक न्यायशास्त्र के दो मूल स्रोत कुरान और हदीस के विरूद्ध है।

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों की संविधान बेंच ने आज अपना फैसला सुना दिया। पांच में से तीन जजों जस्टिस नरीमन, जस्टिस कुरियन जोसफ और जस्टिस यूयू ललित ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया।

तीनों ने सीजेआई खेहर और जस्टिस नजीर की राय का विरोध किया। तीनों जजों ने तीन तलाक को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करार दिया। जजों ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन करता है। यह प्रथा बिना कोई मौका दिए शादी को खत्म कर देती है। कोर्ट ने मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर लगे बैन का जिक्र किया और पूछा कि भारत इससे आजाद क्यों नहीं हो सकता? इस फैसले का मतलब यह है कि कोर्ट की तरफ से इस व्यवस्था को खारिज कि गया है।

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