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कानून अँधा सहायक विकलांग, इंसाफ मिले तो कैसे ?

स्टेटस ऊँचा करने के लिए किसी के इज़्ज़त को बाजार में उछालते समय नहीं याद आती दिनचर्या ?

शुक्रवार 16 नवंबर 2018, कठुआ रेप केस में मुफ्त में भुक्तभोगी का केस लड़ने के लिए उतावली वकील दीपिका राजावत के पास कोर्ट जाने ताक का समय नहीं था । सौ से भी अधिक पेशी में वह महज दो चार बार ही कोर्ट में उपस्थित हुईं ।

नारेबाजी करके हिन्दू मुस्लिम का सहारा लेकर अपना स्टेटस ऊँचा करने के बाद जब कठुआ केस में योगदान देने की बारी आई तो दीपिका राजावत का घर कोर्ट से 150 किलोमीटर दूर हो गया । जीवन बहुत व्यस्त हो गया । पैसे वाले केस याद आने लगे । वो भी एक दो दिन के लिए नहीं सौ से भी अधिक पेशी में वो दो चार से ज्यादा पेशी में उपस्थित न हो पाई ।

दीपिका राजावत को जहाँ उसके दिखावे के लिए मीडिया में बहुत सराहा गया इनाम दिए गए वहीँ पीड़िता के परिवार वालों ने भी दीपिका राजावत को एक बड़ा इनाम दे ही डाला और वो इनाम है दीपिका राजावत को केस से बहार का रास्ता ।

पीड़िता के परिवार वालों ने दीपिका की ख्याति पाने के लिए उनके मृत संतान का इस्तेमाल करना आखिरकार देखा नहीं गया और दीपिका राजावत को उसका वास्तविक आइना दिखते हुए केस से बाहर करने के पुरुस्कार दे दिया ।

जगह जगह सभा करने में, पुरुस्कार लेने में, पीड़िता का इस्तेमाल करने में जिस दीपिका राजावत के पास साधन थे समय था उस दीपिका राजावत के पास पीड़िता को इन्साफ दिलाने के लिए वक्त नहीं था । तारीख पर तारीख देने वाले कोर्ट में चलने वाले इस लड़ाई में दीपिका का यह कहना की उनका पूरा दिन निकल जाता, उनकी नीच मानसिकता को ही दर्शाता है । क्योंकि कोर्ट भी रोज़ रोज़ तारीख नहीं देता है ।

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