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घरेलु हिंसा महिला को अधिकार या परिवार का सर्वनाश ?

घरेलु हिंसा एक ऐसा हथियार जिसका इस्तेमाल कोई विवाहिता अपने ससुराल पक्ष में मिलने वाली किसी भी प्रकार की प्रताड़ना से बचने के लिए इस्तेमाल कर सकती है लेकिन क्या यह कानून  सही है ?

सोमवार 2 सितम्बर 2018, घरेलु हिंसा कानून, दहेज़ कानून जैसे बहुत से ऐसे कानून सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाये गए हैं । भारत में ज्यादातर परिवार ऐसे हैं जहाँ महिलाओं को दहेज़ लिए प्रताड़ित किया जाता है, मारपीट की जाती है, अपशब्द कहे जाते हैं जिससे बचने के लिए और ऐसे माहौल से छुटकारा पाने के लिए कानून ने घरेलु हिंसा जैसा हथियार महिलाओं को दिया है।

क्या है घरेलु हिंसा ?

घरेलु हिंसा में सिर्फ शारीरिक ही नहीं मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना भी शामिल है । अगर महिला के ससुराल में कोई उसे मरता पीटता है अपशब्द कहता है तो महिला घरेलु हिंसा के तहत कोर्ट में केस कर सम्बंधित व्यक्तियों को दण्ड दिलवा सकती है ।

विवाह के पश्चात किसकी जिम्मेदारी है महिला ?

भारतीय कानून के अनुसार विवाह के वक़्त लड़का और लड़की दोनों ही बालिग होते हैं यानि अपना भला बुरा सोंचने में सक्षम और यही वजह होती है कि लड़की के माता पिता उस पुरुष के हाथों अपनी बेटी का हाथ देते हैं जो उसका जीवन प्रयन्त पालन कर सकता हो । महिला का कर्ता धर्ता वह व्यक्ति होता है जिससे उसकी शादी हुई होती है । ससुराल के अन्य सदस्य उस महिला के लिए परिवार का सदस्य होते हैं । इन सभी सदस्यों में महिला का पति ही एक मात्रा ऐसा व्यक्ति है जिसका उस महिला पर पूर्ण अधिकार है और वो पुरुष ही एक ऐसा व्यक्ति है जिस पर उस महिला का पूर्ण अधिकार है और अगर किसी प्रकार का कोई भी विवाद होता है तो उसके जिम्मेदार भी वो ही हैं ।

क्या परिवार में विवाद नहीं होता ?

भारत ही नहीं पुरे विश्व में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जहाँ थोड़ी बहुत नोक झोंक न होती हो किन्तु इस नयी नवेली महिला के लिए घरेलु हिंसा होती है । कानून को लगता है की महिला के साथ घरेलु हिंसा हो रही है क्यों ? अगर परिवार में जरा के तकरार घरेलु हिंसा है तो यह कानून क्यों नहीं की किसी महिला का पुरुष से विवाह करना कानून अपराध है ?

एक पुरुष का विवाह करना में परिवार के साथ साथ रिश्तेदार इत्यादि अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं एक कामयाब विवाह का रूप देने में और जब विवाह समपन्न हो जाता है तो वही नव नवेली महिला इन्हे अपने जीवन का कांटा समझने लगती है । “दहेज़ कानून” तो जैसे महिला के घर वालों के लिए ब्रह्मास्त्र है, जब चाहे केस दर्ज़ करा दो और पुरे परिवार को परेशान कर दो । क्यों ?

क्यों है महिला के लिए भत्ते का प्रावधान ? क्यों किसी दूसरे के द्वारा अर्जित संपत्ति पर होता है केस दर्ज़ ?

भारतीय में माता पिता के द्वारा अर्जित संपत्ति पर संतान का कब्ज़ा होता है क्यों ? माता पिता ने अपनी मेहनत से धन अर्जित किया उसपर सिर्फ और सिर्फ उनका ही अधिकार होना चाहिए और जिसे भी चाहे वो अपना धन दें उसपर सिर्फ उनका ही अधिकार होना चाहिए ।

ठीक उसी प्रकार किसी महिला को अगर अपने पति से दिक्कत है तो दोषी पूरा परिवार हो जाता है । क्यों ? महिला को जीवन यापन के लिए भत्ता वो पुरुष क्यों दे जिससे उसको तकलीफ हुई है ? महिला के साथ अगर कोई गलत हुआ है तो दोषी को सजा होनी चाहिए अगर महिला को उसके पति के साथ निर्वाह नहीं हो पा रहा तो उसे तलाक मिलना चाहिए लेकिन गुज़ारा भत्ता क्यों ?

गरीब से गरीब महिला भी हमारे देश में अपना और अपने बच्चों का पेट पाल लेती हैं लेकिन एक पढ़ी लिखी महिला कोर्ट में जाकर गुज़ारा भत्ता मांगती है क्या यह लालच नहीं है । सालों से हिंसा में भी हमारे देश में परिवार शब्द सुनने को मिलता है लेकिन घरेलु हिंसा जैसे कानून के बाद 2 दिन ससुराल में रहकर पूरा परिवार दोषी हो जाता है और तो और भत्ता के लिए भी कोर्ट में सुनवाई होने लगाती है क्यों ?

अब सवाल ये उठता है कि घरेलु हिंसा कानून कहाँ तक सही है –

अगर किसी महिला के साथ किसी प्रकार की हिंसा होती है तो पुरे परिवार के खिलाफ केस रजिस्टर्ड हो जाता है फिर चाहें केस परेशान करने के लिए रजिस्टर क्यों न करवाया गया हो । कानून में दहेज़ लेना और दहेज़ देना दोनों ही कानून की नज़र में अपराध है किन्तु जब महिला केस दर्ज़ कराते समय दिए गए दहेज़ का जिक्र अपने वक्तब्य में करती है तो कोर्ट उसपर कोई करवाई नहीं करता या ये नहीं पूछता कि दहेज़ तुमने दिया क्यों ?

क्या कानून खुद दहेज़ प्रथा को बढ़ावा नहीं दे रहा ? अगर कानून ऐसे मामलों में करवाई महिला या उसके परिवार वालों पर करता तो 100% दहेज़ प्रथा ख़त्म हो जाती नहीं तो ऐसा केस अदालत में नहीं आता ।

महिला शादी से पहले अपने माता पिता पर बोझ होती है किंतु शादी हो जाने के बाद उसका माता पिता के साथ गुज़ारा करने में कोई आपत्ति नहीं होती क्योंकि कानून द्वारा महिला के पति से पेंसन योजना (गुज़ारा भत्ता ) चालू हो जाती है अब चाहें महिला पड़ी लिखी हो उसके घर में रहने की अच्छी व्यवस्था हो । उस व्यक्ति से जिसके साथ उस महिला का गुज़ारा संभव नहीं था से कानून द्वारा भत्ता मिलने लगता है आखिर क्यों ? पति ने अपराध किया तो सजा दो, गुज़ारा भत्ता ?

घरेलु हिंसा की ज्यादातर कारण पति को परिवार से अलग कर अलग जीवन यापन करने का होता है किन्तु वह महिला और कानून दोनों ही ये भूल जाते हैं की भारत में परिवार की सकती ही एक दूसरे को बंधे रखती है और जब इन अधिकारों की दुरूपयोग कर पीड़ित की परिवार को परेशान किया जाता है तो उसमें भी महिलाएं पुरुष और वो बच्चे होते हैं जिससे इसका कोई लेना देना नहीं होता है ।

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