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उत्तर प्रदेश परिवहन बसों में महिलाओं के लिए फ्री यात्रा की घोषण

रक्षाबंधन के चलते उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की अंतर्गत आने वाली सभी बसों में मुफ्त में कर सकेंगी यात्रा ।

सावन की पूर्णिमा को मनाया जाने वोले रक्षाबंधन भाई बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा करने का वचन देता है।

कैसे मनाएं रक्षा बंधन?

प्रातः जल्दी उठकर नहाधोकर पूजा की थाली तैयार करती हैं बहने। थाली में राखी के साथ-साथ कुमकुम, हल्दी, चावल, मिठाई और कुछ पैसे भी होते है। सबसे पहले देवताओ की पूजा की जाती है और उसके बाद भाई के माथे पर हल्दी और कुमकुम से टीका लगाकर उनपर चावल लगाए जाते है और थोड़े से उसके सर पर छिड़के जाते है।

भाई की आरती उतरने की बाद उसकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी जाती है। भाई की लंबी आयु के लिए की लिए प्रार्थन करती हैं । थाली में रखे पैसो को भाई पर न्योछावर करके गरीबो में दान कर दिया जाता है। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी न बांध लेने की बाद ही अन्न जल ग्रहण करती हैं । राखी बंधवाने के बाद भाई अपनी क्षमता अनुसार बहन को उपहार या धन देता है साथ ही भाई अपनी बहन की उम्रभर रक्षा करने का वचन देता है।

रक्षा बंधन की पौराणिक कथा

रक्षा बंधन में सबसे अधिक महत्व राखी यानी रक्षा सूत्र का होता है। राखी कच्चे सूत के धागे जैसी सस्ती वस्तु से लेकर डिजाइनर सूत, रंगीन कलावे, रेशमी धागे, नग मोती लगे धागों और सोने चांदी जितनी महंगी वस्तुओं तक की हो सकती है। वैसे तो रक्षा बंधन का पर्व भाई बहन मनाते है लेकिन वास्तव में इसकी पहल पति-पत्नी ने की थी।

कथानुसार एक समय दानवों ने देवताओ पर आक्रमण कर दिया था। जिसमे देवों की पराजय होने लगी जिसके कारन देवराज इंद्र की पत्नी घबरा कर पने स्वामी के प्राणों की रक्षा करने के लिए तप करने लगी। फलस्वरूप उन्हें एक रक्षा सूत्र प्राप्त हुआ जिसे उसने इंद्र की कलाई पर बांध दिया। शचि ने इस रक्षा सूत्र को सावन महीने की पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांधा था इसलिए इसे रक्षा बंधन कहा जाता है। रक्षा सूत्र प्राप्त होने के पश्चात देवताओ की जीत हुई और दानव पाताल लोक वापस चले गए।

राखी बांधने का मंत्र

‘येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः |
तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे ! माचल ! माचल ! ||

इसका अर्थ है – जिस प्रकार राजा बलि में रक्षा सूत्र से बंधकर विचलित हुए बिना अपना सब कुछ दान कर दिया, उसी प्रकार हे रक्षा! आज मैं तुम्हें बांधता हूं, तू भी अपने उद्देश्य से विचलित न होना और दृढ़ बना रहना ॥

रक्षाबंधन 2018 (मुहूर्त)

26 अगस्त 2018 को मनाये जाने वाले मुख्य त्यौहार रक्षाबंधन का शुभ मुहर्त सुबह के 05:59 से शाम की 05:25 बजे तक ।

रक्षा बंधन में अपराह्न मुहूर्त = 13:39 से 16:12 तक।

भद्रा विचार

रक्षा बंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी।

सावन पूर्णिमा का आरंभ = 25 अगस्त, शनिवार 15:16 बजे
सावन पूर्णिमा समाप्त = 26 अगस्त, रविवार 17:25 बजे

किसी भी शुभ कार्य को भद्रा में नहीं करना चाहिए।

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