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गोमती एक्सप्रेस का बदला स्वरुप, रिज़र्वेशन में जनरल की सजा ।

जनरल डिब्बे और रिज़र्वेशन डिब्बे में कोई अंतर नहीं ।

बुधवार 29 अगस्त 2018, कई महीनों से बंद पड़ी गोमती एक्सप्रेस एक नए स्वरुप में दिखी । पहले जहाँ रिजर्वेशन डिब्बे में सीट लगी होती थे अब उसके जगह चेयर सीट ने ले ली है । 3 व्यक्तियों की बनी चेयर सीट पर आज भी चार से पांच लोग बैठने का प्रयास करते हैं । गोमती की इस रिजर्वेशन डिब्बे में लगी सुविधाएँ अब धीरे धीरे लोग अपनी संपत्ति समझकर घर ले जाने लगे हैं ।

भीड़ इतनी कि महिलाओं और बच्चों का टोयलेट जाना मुश्किल 

रिजर्वेशन डिब्बे में जहाँ रिज़र्व सीट की अलावा बिना टिकट यात्री और जनरल टिकट से यात्रा करने वाले यात्री इतने अधिक संख्या में चढ़ जाते हैं की अगर कोई महिला बाथरूम की लिए जाना चाहे तो उसे 10 बार सोंचना पड़ेगा की वह टोयलेट जाये या न जाये । अगर किसी महिला को टोयलेट जाना भी पड़ा तो पहले तो कितने पुरुषों की बीच से उसे गुज़ारना पड़ेगा और अगर पहुँच गई तो उसे अपने सीट पर आने में 1/2 -1 घंटा तो लग ही जाता है ।

ट्रैन से उतरना और चढ़ना मुश्किल 

स्टेशन आने पर अगर कोई यात्री उतरना चाहे तो पहले तो अंदर खड़े लोग ही बहार नहीं निकलने देंगे और अगर किसी तरह गेट पर पहुँच गए तो चढ़ने वाले नहीं उतरने देंगे । किसी तरह उतरे भी तो सामान कहीं और आप कहीं प्लेटफार्म पर नज़र आएंगे । आखिर गोमती एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करने से यात्री को क्या लाभ ? फॅमिली लेकर चलने वाला व्यक्ति कैसे सफर कर सकता है ऐसे हालत में ?

 

क्या लाभ है यात्री को ?

अब सवाल ये उठता है कि रेलवे ने रिजर्वेशन कोच बनाया ही क्यों है ? अगर रिजर्वेशन कोच में कोई चेकिंग है ही नहीं तो इसे जनरल कोच क्यों नहीं बना देती सरकार ? बिना टिकट यात्रा करना है तो रेलवे विभाग इसे लागु क्यों नहीं करता ? सभी के लिए टिकट फ्री यात्रा क्यों नहीं ? जब रिजर्वेशन कोच में जनरल कोच जैसे यात्री सफर कर रहे हों तो क्यों न करें कोच में तोड़ फोड़ ? बच्चे और महिलाएं टॉयलेट रूम तक नहीं जा पा रहें तो इस ट्रैन में रिजर्वेशन करने से क्या लाभ ?

 

 

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