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देश को वेवकूफ बनाया या खुद को, 19 दिनों का नाटक किसलिए ?

हार्दिक पटेल का भूखहड़ताल समाप्त । 19 दिनों के बाद हार्दिक पटेल को समझ आया की उन्हें लम्बी लड़ाई लड़नी है ।

बुधवार 12 सितम्बर 2018, भारत में इन दिनों राजनितिक, धार्मिक कलाकारों के व्यर्थ के कार्यों से जनता को परेशान और गुमराह करने का दौर सा चल पड़ा है । इसे दौड़ में दौड़ रहे हार्दिक पटेल ने आज पार्टी और विपक्ष के कुछ राजनितिक सलाहकारों की बात मानकर 19 दिन की भूख हड़ताल की लीला समाप्त कर दी है ।

नहीं मिली कोई सफलता ।

हार्दिक पटेल की मांग थी कि आरक्षण की मांग में अपनी जान गवाने वाले पाटीदारों को सरकारी नौकरी मिले और पटेल समाज को आरक्षण दिया जाये । 19 दिनों कि इस अदाकारी को पटेल ने बखूबी निभाया किन्तु सफल परिणाम न दे पाए । इस अदाकारी में पटेल ने एक बीच अपनी ख़राब हालत की दुहाई देकर वसीयत तक कर डाली और जब उससे भी TRP नहीं बढ़ी तो प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती हो गए । किन्तु पटेल को इससे भी कोई सफलता नहीं मिली ।आश्चर्य कर देने वाली अदाकारी तो तब दिखी जब हार्दिक ने 36 घंटे बिना जल ग्रहण किया बिता दिया । ऐसा तो शायद आज के दिन हरतालिका तीज व्रत रख रही वो महिलाएं भी न कर पाएं जिन्हे ये पता है कि दूसरे दिन तो जल ग्रहण करना ही है ।

आरक्षण हो या ख़त्म हो ?

आरक्षण की मांग को लेकर जहाँ पटेल ने 19 दिन बिता दिए वहीँ स्वर्ण समाज आरक्षण को ख़त्म करने के लिए आंदोलन कर रहा है । आंदोलन करते समय अगर कोई व्यक्ति के मृत्यु हो जाये तो वो फिर भूख हड़ताल पर बैठ जायेगा कि उसे सरकारी नौकरी दी जाये क्योंकि देश के काम काज को थप करने और देश की जनता को बिना वजह परेशान करने उसने महँ काम किया है ।

फिलहाल पटेल ने समझ लिया है की उनके जरुरत देश को है और 19 दिनों से वो बिना किसी मतलब के विस्तार पर लेते हुए थे । साथ ही साथ विपक्षियों को भी यह विदित हो गया है की हार्दिक पटेल एक लम्बी लड़ाई लड़ेंगे ।

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