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क्या भारत का किसान भिखारी है ? अगर हाँ तो जय क्यों ?

24000 रुपये का कर्ज था किसान पर, माफ हुए 13 रुपये

हर राजनितिक पार्टी किसानों का क़र्ज़ माफ़ी का वादा कर रही है आखिर क्यों ? क्या किसान इतना लाचार हो चूका है ?

गुरुवार 15 नवंबर 2018, हर राजनितिक पार्टी किसानों की क़र्ज़ माफ़ी के लिए वादे कर रही है । कांग्रेस 10 दिन में कर्ज मॉफ करने की बात कर रही है तो समाजवादी पार्टी 1 घंटे में । अगर किसानों का कर्ज मॉफ हो सकता है तो देश के हर उस व्यक्ति का कर्ज माफ होना चाहिए जिसने किसी कारन वश बैंक से कर्ज लिया है ।

 आखिर व्यक्ति कर्ज लेता क्यों है ?

 क्या किसान सिर्फ कर्ज लेता है ? बैंक उसे कृषि के लिए कर्ज देता क्यों है ? क्या किसान की फसल हमेशा बर्बाद हो जाती है ? अगर किसी साल फसल नहीं होती तो सरकार सारा कर्ज मॉफ कर देगी ? कर्ज माफी के बाद कौन मुर्ख खेती में माथा पच्ची करेगा ? कई सवाल ऐसे ही हैं ।
लाल बहादुर शास्त्री ने कहा था जय किसान ।
एक समय था जब देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया था जय जवान जय किसान । किसान देश का अन्न दाता होता है । किसान जिस मिटी में अपनी कुदाल चला देता है वो अन्न रूपी सोना उगलती है । ऐसे महान व्यक्तित्व होता है एक किसान का । इसी वजह से लाल बहादुर ने किसानो के लिए जय कहा था ।
क्या आज किसानो के लिए जय शब्द उचित है?
देश में खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें ये ब्यान करने लगी हैं की किसान खेतों में कितना मेहनत कर रहा है । किसानों की कर्ज माफी के लिए निकलती रैलियों ने साफ़ कर दिया है कि किसानो के कुदाल में कितना दम रह गया है । देश का अन्न दाता खुद सरकार के दया पर आश्रित हो गया है ।

क्या कर्ज माफी से फसलें लहलहाने लगेंगी ?

कर्ज माफी कि जगह क्या सरकार उन किसानो के लिए कुछ ऐसा नहीं कर सकती की वो अपनी मेहनत से इस लायक हो जाये की अपना कर्ज चूका सकें और यही नहीं अपने और अपने परिवार के साथ साथ देश के करोड़ों जनता को अन्न उपलब्ध करा सकें ।

किसी भिखारी को कुछ पैसे दे देने से उसका देश के निर्माण में कोई योगदान तो नहीं हो जाता । अगर उस भिखारी से श्रम करवा कर बदले में उसे कुछ दिया जाय तो उसका श्रम देश के लिए और दिया गया पैसा उसके सम्मान के लिए काम आएगा ।

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