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दहेज उत्पीड़न के मामलों में अब सीधे गिरफ्तारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक का फैसला महिलाओं के पक्ष में

नई दिल्ली: आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज उत्पीड़न मामले में में अब सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दहेज उत्पीड़न मामले को देखने के लिए प्रत्येक जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने से पहले कोई गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए । सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की है और लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि हर जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन किया जाए, जिसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों।

आप को बता दें कि 3 जुलाई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया था और कहा था कि दहेज प्रथा विरोधी कानून का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य बेंच ने पुलिस को यह हिदायत भी दी थी कि दहेज उत्पीड़न के केस में आरोपी की गिरफ्तारी सिर्फ जरूरी होने पर ही की जाए।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.के. गोयल और जस्टिस यू.यू. ललित की बेंच ने कहा है कि अगर महिला जख्मी हो या फिर उसकी उत्पीड़न की वजह से मौत हो जाए तो मामला अलग होगा और फिर वह इस दायरे में कवर नहीं होगा।

काफी मात्रा में की जाने वाली गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना के मामले में चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दहेज उत्पीड़न से जुड़ा मामला गैरजमानती है इसलिए लोग इसे हथियार बना लेते हैं। दहेज उत्पीड़न के अधिकतम मामले में आरोपी बरी होते हैं और सजा दर सिर्फ 15% है। ऐसे मामले में गिरफ्तारी के वक्त पुलिस के लिए निजी आजादी और सामाजिक व्यवस्था के बीच बैलेंस रखना जरूरी है।

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