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कैसे बुद्धिजीवी ? अपने हाथों से अपने लिए जहर घोल रहे हैं ?

पंचतत्व से बना मानव शरीर सबसे अधिक बुद्धिजीवी मन जाने वाला प्राणी है फिर इनके द्वारा की गयी यह कैसी बुद्धिमता है ।

गुरुवार 8 नवंबर 2018, जीवन को जीने के लिए स्वच्छ हवा और स्वच्छ पानी की हर एक जीवित प्राणी को जरुरत होती है । ईश्वर द्वारा बनाये इस प्रकृति में वातावरण को संतुलित करने के लिए सभी आवश्यक माध्यम मौजूद हैं । मानव जिसे ईश्वर द्वारा रची गयी सबसे बुद्धिमान प्राणी कहा जाता है ।

आज के मौजूदा हालत को देखते हुए यही प्रश्न उठता है कि यह कैसी बुद्धिमता है ? बुधवार को दीपावली के शुभ अवसर पर लोगों ने खूब जहर उगला । सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए समय प्रतिबंद के वावजूद लोगो ने खूब पटाखे फोड़े और उनसे निकलने वाला धुंआ वायुमंडल में जहर की तरह फ़ैल गया ।

सवाल यह है कि जब हमें पता है कि हमे सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा की जरुरत है तो पहले हवा को दूषित कर फिर मास्क पहनकर घूमना कहाँ की बुद्धिमता है । सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण के लिए सुरक्षित पटाखे छोड़ने के आदेश दिए थे । क्या कोई पटाखा ऐसा बना या जलाया गया होगा जिससे मानव के लिए ऑक्सीजन निकली हो ? नहीं ।

देश की राजधानी में पहले ही साँस लेना दुर्लभ था और दीपावली में आतिशबाजी ने और जहर घोल दिया और अब ऊँगली प्रशासन पर उठेगी । किन्तु उस समय मनुष्य की बुद्धिमता कहाँ चली जाती है जब वह अपने लिए ही जहर घोल रहा होता है ?

दीपावली पर फोड़े गए पटाखों से कितनी खुशियां बटोरी गयीं ? ईश्वर द्वारा रची इस खूबसूरत दुनिया में अपने लिए मानव जहर घोल रहा है । सुबह के वातावरण को देखकर कोई कह नहीं सकता की चलो थोड़ा शारीरिक श्रम ( व्यायाम ) कर लें फिर उन्हें एक दिन पहले पटाखों से खुश होकर कौन सा खज़ाना मिल गया । उल्टा जो खज़ाना हमें ईश्वर ने प्रदान किया है उसे हमने गवां दिया ।

 

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