Home » India » पुतिन से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत-रूस संबंध हुए मजबूत

पुतिन से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत-रूस संबंध हुए मजबूत

पुतिन से मिले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत-रूस संबंध हुए मजबूत

सेंट पीटसबर्ग:  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आज आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर तथा ऊर्जा और व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर व्यापक बातचीत की। अपनी मुलाकात की शुरूआत में मोदी ने पुतिन से कहा कि वह प्रधानमंत्री के रूप में पुतिन के गृहनगर आकर खुश हैं। पहली बार रूस में भारत-रूस शिखर वार्ता मॉस्को से बाहर सेंट पीटर्सबर्ग में हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सामान्य तौर पर अंतरराष्ट्रीय संबंध ऊपर नीचे होते रहते हैं लेकिन इतिहास गवाह है कि भारत-रूस संबंधों में कोई उतार चढ़ाव नहीं आया।’’ मोदी ने भारत को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की सदस्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए रूस के राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया। पुतिन ने कहा कि भारत एक सप्ताह में एससीओ का पूर्णरूपेण सदस्य बन जाएगा। मोदी ने पुतिन के साथ बातचीत में सुबह द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों के स्मारक के अपने दौरे का जिक्र किया।

पीएम मोदी ने सेंट पीटर्सबर्ग स्थित शहीद स्मारक में द्वितीय विश्वयुद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। द्वितीय विश्वयुद्ध में मारे गए पांच लाख सैनिकों की स्मृति में सेंट पीटर्सबर्ग में शहीद स्मारक बनवाया गया है। ये सैनिक लेनिनग्राद पर हमले के दौरान मारे गए थे।

भारतीय अधिकारियों ने बताया कि तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की इकाई 5 और 6 के निर्माण के लिए ऋण सहायता पर समझौते के विवरण और भाषा को लेकर अंतिम दौर की बातचीत चल रही है।

संयंत्रों का निर्माण भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और रूसी परमाणु संयंत्रों की नियामक संस्था रोसाटॉम की सहायक कंपनी एस्तमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट कर रहे हैं।

दोनों पक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रेलवे, सांस्कृतिक आदान-प्रदान समेत व्यापक क्षेत्रों में और निजी पक्षों के बीच अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी 12 समझौतों पर दस्तखत कर सकते हैं।

दोनों नेता एक ‘विजन डॉक्यूमेंट’ भी जारी करेंगे। यदि परमाणु समझौते पर दस्तखत किए जाते हैं तो यह सम्मेलन का केंद्र बिंदु होगा। इससे पहले अक्टूबर 2016 में गोवा में पिछले द्विपक्षीय सम्मेलन में भी यह केंद्र बिंदु था।

अगर करार हो जाता है तो एक-एक हजार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली दोनों इकाइयां देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को महत्वपूर्ण तरीके से बढ़ाएंगी। फिलहाल देश में सभी 22 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की बिजली उत्पादन क्षमता 6780 मेगावाट है।

Check Also

पुलवामा के बाद क्या पाकिस्तानी कलाकारों के भारत में काम देना सही ?

आतंकी हमले में 40 जवानों के शहीद होने के बाद 2 आतंकियों का एनकाउंटर करते …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *