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फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी, दाखिले वैध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक का फैसला महिलाओं के पक्ष में

सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण के तहत मिली सरकारी नौकरी या दाखिले को कानून की नजरों में वैध नहीं ठहराया जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्त जे.एस. खेहर और न्यायमूर्ति डी.वाई.चन्द्रचूड़ की पीठ ने इस संदर्भ में बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को सही नहीं ठहराया जिसने कहा था कि अगर कोई व्यक्ति बहुत लंबे समय से नौकरी कर रहा है और बाद में उसका प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो, उसे सेवा में बने रहने की आज्ञा दी जा सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने बंबई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार द्वारा दायर याचिका सहित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आज यह फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि कहा कि इस आदेश को पिछली तिथि से लागू नहीं किया जा सकता है, यह फैसला भविष्य में आने वाले मामलों में ही प्रभावी होगा।

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