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नवरात्री के 6वें दिन करें कात्यानी माता की आराधना

माता के 9 रूपों की आराधना नवरात्री में की जाती है और आज  सोमवार 15 अक्टूबर को माँ के कात्यानी रूप की पूजा की जाएगी ।

सोमवार  15 अक्टूबर 2018, षष्ठी यानि माता के 6वें रूप का दर्शन । आज  माता के 6वें रूप की आराधना के साथ साथ माता सरस्वती की भी आराधना की जाएगी ।

कैसे पड़ा माता का यह नाम ?

कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी माँ भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। माँ भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।

कुछ समय पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की। इसी कारण से यह कात्यायनी कहलाईं।

कात्यायनी माँ ने किया महिषासुर का वध:

आश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेकर शुक्त सप्तमी, अष्टमी तथा नवमी तक तीन दिन इन्होंने कात्यायन ऋषि की पूजा ग्रहण कर दशमी को महिषासुर का वध किया था।

ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं माँ कात्यायनी

गोपियों का भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने की इच्छा रखने वाली गोपियों ने माँ कात्यायनी की पूजा की थी । गोपियों ने माँ कात्यायनी के पूजा के लिए कालिंदी – यमुना तट को चुना और माँ कात्यायनी की उपासना करके इच्छित फल की प्राप्ति की थी । माँ कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

माँ कात्यायनी का स्वरुप 

चार भुजाओं वाली माँ कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भास्वर है। माँ कात्यायनी का दायीं तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।

माँ कात्यायनी की प्रार्थना का महत्व:

माँ कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। माँ कात्यायनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है।

उपासना

नवरात्रि के छठे दिन माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए दिए गए मंत्र को कंठस्थ कर जाप करना चाहिए।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

कुंवारी बालिकाओं के उत्तम वर के लिए कात्यायनी माँ की उपासना फलदायक होती है और इससे उनको मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

उत्तम वर प्राप्ति के लिए कात्यायनी माँ का जाप इस मंत्र द्वारा करना चाहिए –

ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि । नंदगोपसुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नम:॥

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