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आज है रामायण रचयिता और लव-कुश गुरु बाल्मीकि जी की जयंती

रामायण के सभी पात्रों  में एक महान चरित्र था बाल्मीकि जी का । आज देश मना रहा है उनकी जयंती ।

बुधवार 24 अक्टूबर 2018, भारत वर्ष में रामायण एक ऐसा पवित्र ग्रन्थ है जिसको हिन्दू धर्म में मोक्ष का एक मात्र साधन मन गया है । त्रेतायुग में श्री राम ने जब अपने धाम की ओर प्रस्थान किया था तब उन्होंने हनुमान जी को यहीं रह कर राम कथा का प्रचार और प्रसार का आदेश दिया था । श्री राम ने हनुमान से कहा था कि कलयुग में जब अधर्म चरम सीमा पर होगा और असत्य और हिंसा का माहौल चारों ओर होगा उस वक़्त मनुष्य के लिए मोक्ष का कोई अन्य साधन नहीं होगा । राम कथा ही कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का एक मात्र साधन होगा ।

जिस रामकथा की बात श्री राम जी ने हनुमान जी से कही थी उसी कथा को एक महान ग्रन्थ के रूप में रचित किया गया जिसके रचयिता थे, “महृषि बाल्मीकि” । रामायण जैसा पवित्र ग्रन्थ हिन्दू धर्म में पूजनीय है और पवित्र है ।

श्री राम जी ने जब लोक निंदा के चलते माता सीता का त्याग किया और वो वन में छोड़ी गयीं तब महृषि बाल्मीकि ने ही माता सीता को शरण दी । माता सीता के दो पुत्र हुए – लव और कुश । महृषि बाल्मीकि ने लव और कुश को धनुष विद्या में इतना निपुण कर दिया था की अश्वमेघ का घोडा जीतना भी अयोध्या के क्षत्रियों के लिए नामुनकिन हो गया । यही नहीं महृषि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का पाठ भी लव कुश ने पढ़ा था क्योंकि महृषि बाल्मीकि ने इस ग्रन्थ की रचना पहले ही कर दी थी ।

याद रखने योग्य बातें :
बाल्मीकि जयंती को प्रगट दिवस के नाम से भी जानते हैं ।
बाल्मीकि जी ने रामायण जैसे महाग्रंथ की रचना की थी ।
बाल्मीकि ने माता सीता को शरण दी थी ।
बाल्मीकि लव और कुश के गुरु थे ।
बाल्मीकि जयंती आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है ।

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