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कल है करवा चौथ, सुहागिने रखेंगी निर्जल व्रत

करवा चौथ कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष के चतुर्थी के दिन मनाया जाता है और सुहागिने अपने पति की लम्बी आयु के लिए पूरा दिन निर्जल व्रत रखती हैं ।

शुक्रवार 26 अक्टूबर 2018, कल शनिवार के दिन सुहागिने करवा चौथ का व्रत रख अपने सुहाग के लम्बी आयु की प्रार्थना करेंगी । इस दिन सुहागिने बिना जल ग्रहण किये सारा दिन उपवास रखती हैं और रात्रि के समय चाँद को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं । चाँद को अर्घ्य देते समय पत्नी के साथ उसका पति भी होता है क्योंकि पत्नी पति का मुख देखकर और अपने पति के हाथों से जल ग्रहण कर ही अपना व्रत खोलती हैं ।

करवा चौथ व्रत की विधि

जिस प्रकार किसी भी कार्य को विधि पूर्वक किया जाय तो उसका परिणाम भी फलदायक होता है अन्यथा गंभीर परिणाम देने वाला होता है ठीक उसी प्रकार किसी भी व्रत को करने की एक विधि होती है जिसका पालन करते हुए ही व्रत का फल मिल सकता है अन्यथा जीवन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।

करवा चौथ के दिन स्त्रियों का श्रंगार विशेष स्थान रखता है क्योंकि यह व्रत पति की लम्बी आयु के लिए रखा जाता है । करवा चौथ के दिन अन्न जल फल इत्यादि कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता । पूरा दिन स्त्रियों का बिना कुछ ग्रहण किए व्रत का रखना पड़ता और रात्रि का चाँद के आकाश में दिखाई देते ही अर्घ्य देकर व्रत का पूर्ण करना होता है । चाँद का अर्घ्य देने का बाद व्रत पूर्ण होता है और स्त्रियां कुछ भी खा पी सकती हैं ।

यह व्रत श्री गणेश भगवान को समर्पित है और इस दिन श्री गणेश भगवान की पूजा के साथ साथ माता पार्वती और भगवान शिव की भी पूजा की जाती है । पूजन के समय व्रत कथा सुनना शुभ होता है ।

करवा चौथ की व्रत कथा 

एक साहूकार के 7 पुत्र और 1 पुत्री थी । साहूकार के पुत्र अपने बहन से अत्यधिक प्रेम करते थे और उसे किसी भी प्रकार से दुखी नहीं देख सकते थे । कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी को साहूकार के घर की सभी महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा । साहूकार के पुत्री ने भी अपने पति के लिए व्रत रखा ।

पूरा दिन निर्जल व्रत रखने से साहूकार की पुत्री का चेहरा उतर गया था । उधर साहूकार के पुत्र जब खाना खाने के लिए बैठे तो उन्होंने अपने बहन का उतरा हुआ चेहरा देखकर उसका कारन पूछा । साहूकार की पुत्री ने अपने भाईओं को व्रत की बात बताई और यह भी कहा की वह विधिपूर्वक अपना व्रत पूर्ण करने के बाद ही अन्न जल ग्रहण करेगी ।

सातों भाई अपनी बहन का उतरा हुआ चेहरा देख उदास हुए और उनकी इच्छा नहीं हुई कि वो भोजन ग्रहण कर सकें । सातों भाई अपनी बहन को भोजन करने का उपाय सोंचने लगे । अपने बहन को भोजन करा उसके चहरे से उदासी को दूर करने के लिए उन्होंने दूर आग जला दी और अपनी बहन से कहा की चाँद निकल आया है जल्दी से अर्घ्य दे दो और चलो भोजन ग्रहण कर लो ।

बहन बहुत खुश हुई और भागते हुए बाकि की महिलाओं को यह खबर सुनाई । घर की अन्य महिलाओं को इस बात का ज्ञान था और उन्होंने इस सत्य को उजागर भी किया । बहन को अपनी भाइयों पर बहुत भरोसा था इसलिए भाई की बात मानकर बहन ने जलते हुए किसी वास्तु को चाँद मानकर अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया ।

श्री गणेश भगवान इस आचरण से बहुत क्रोधित हुए और अनजाने में भी किये गए गलत पूजन के कारण उस बहन को बहुत कष्ट भोगना पड़ा । उसका पति बीमार हो गया । घर से सुख संपत्ति न नाश हो गया । पति के बीमारी में ही सारा धन खर्च हो गया ।

उधर साहूकार को जब इस बात का पता चला तो उसने अपनी पुत्री से इसी दिन फिर से व्रत रखवाया और इस बार किसी प्रकार की कोई भूल नहीं की । पूरा दिन निर्जल व्रत रख पूजन विधि द्वारा भगवान श्री गणेश के पूजा कर रात्रि को चाँद को अर्घ्य देकर व्रत को पूरा किया। भगवान श्री गणेश इस बार उसकी कठिन आराधना से काफी प्रसन्न होकर उसके सभी दुखों को दूर कर दिया ।

भगवान श्री गणेश की कृपा उस साहूकार की पुत्री पर हुई और उसका पति भी स्वस्थ रहने लगा घर में सूखा का आगमन हुआ । घर में मनो धन की वर्षा होनी लगी ।

करवा चौथ और किसी अन्य व्रत या किसी प्रकार की भी पूजा को विधि पूर्वक करना चाहिए तभी सही परिणाम मिलते हैं अन्यथा इसका भयानक परिणाम भी हो सकता है ।

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