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“मन चंगा तो कठौती में गंगा “, फिर सबरीमला के लिए क्यों है दंगा ?

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या सही है । वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़ने से क्या मिल जायेंगे भगवान?

शुक्रवार 16 नवंबर 2018 , सबरीमला मंदिर में उन महिलाओं के प्रवेश पर रोक है जिनको मासिक धर्म आता है । सम्पूर्ण रूप से महिलाओं का प्रवेश वर्जित नहीं है । सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर उम्र की महिला उस मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं जहाँ वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है ।

सबरीमला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मंदिर में श्रद्धा रखने वाले नहीं पचा पा रहे हैं और इसका विरोध लगातार कर रहे हैं । तृप्ति देसाई जो कोच्चि एयरपोर्ट पर पहुंची हैं और सबरीमला मंदिर में प्रवेश करना चाहती हैं उनका खुलकर विरोध हो रहा है ।

तृप्ति देसाई नारी समानता के लिए लड़ने वाली और भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक हैं । सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध पहले भी महिलाओं को सबरीमला में घुसने नहीं दिया था ।

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