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क्या समाज का माहौल बिगाड़ रहा सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट जहाँ लोग न्याय के लिए जाते थी अब लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है । कोर्ट द्वारा बनाये गए कानून या निर्णय से कोई भी खुश नहीं दिखता ।

शनिवार 17 नवंबर 2018, सबरीमाला में जहाँ वर्षों से मासिक धर्म रखने वाली महिलाओं के जाने पर प्रतिबन्ध था सुप्रीम कोर्ट ने उसे हटाकर कौन सा समानता का अधिकार महिलाओं को प्रदान किया है ? तृप्ति देसाई अगर सबरीमाला में दर्शन कर लेती है तो कौन सा वरदान महिलाओं को वहां मिलने वाला है ?

तृप्ति देसाई के यह कदम कठुआ केस जैसा है सिर्फ नाम कमाने के लिए मंदिर में घुस जाओ फिर घर में चाहे बैठ का मदिरा उड़ाओ ।

दीपावली पर जलने वाले पटाखे , मंदिरों में बजने वाले घंटे , सबरीमला में शांतिपूर्वक चलने वाली प्रार्थना, राम जन्म भूमि, पारिवारिक मामले इत्यादि सभी में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाक घुसेड़ रखी है और इससे किसी को भी खुशी का अहसास तक नहीं होता ।

जानकारी के अनुसार परम्परा को न तोड़ पाने और एयरपोर्ट पर ही कैद रही तृप्ति देसाई अब बिना बताये मंदिर पहुंचेंगी।

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