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ईश्वर के नाम पर धोखा, अब और न होगा

अयोध्या मामल को राजनितिक ढाल बनाकर राजनितिक पार्टियां वर्षों से अपनी रोटियां सेक रहीं हैं ।

शनिवार 3 नवंबर 2018 , पक्ष हो या विपक्ष राम मंदिर मुद्दा दोनों के लिए राजनितिक फायेदा उठाने का जरिया मात्र है । जब तक भारतीय जनता पार्टी सत्ता में नहीं थी तब तक राम मंदिर के नाम पर बहुमत जुटाने के लिए दिन रात प्रयासरत थी । अब जब सत्ता मिल गयी तो साढ़े 4 वर्षों तक इसका खूब उपभोग किया और जब चुनाव आया तो फिर याद आ गया राम मंदिर ।

विपक्षियों के लिए भी राम मंदिर वोट बैंक के लिए इस्तेमाल होता आ रहा है । मुस्लिम वोटर को प्रसन्न करने के लिए मुलायम सिंह यादव ने तो गोलियां भी चलवा दी । इस समय का माहौल इतना बदल चूका है कि पक्ष और विपक्ष दोनों हे भगवान राम की शरण में हैं और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कई लोगो को राम का भक्त भी बना दिया है ।

विपक्ष भी बन गया है ईश्वर – भक्त 

अपर्णा यादव मुलायम सिंह यादव की बहु ने भी अपने ब्यान में राम मंदिर का समर्थन किया था । कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी का तो यह हाल हो चूका है की उनके अध्यक्ष मंदिर मंदिर जा कर माथा टेकने लगे हैं । कलकत्ता की ममता बनर्जी ने तो दुर्गा पंडाल में चंदा भी दिया है ।
अब अगर कांग्रेस या किसी विपक्षी पार्टी से राम मंदिर पर सवाल पूछो तो सांसे अटक जाती हैं और सुप्रीम कोर्ट बचाव की तौर पर बीच में आ जाता है ।
सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या के विवादित स्थल पर निर्णय लेने में देरी के कारण हिन्दू समाज काफी नाराज़ है और सरकार से अध्यादेश लेकर कानून बनाए की मांग कर रहा है ।
शिव सेना, विश्व हिन्दू परिषद्, आरएसएस इत्यादि बड़े बड़े संगठन जिसके बल पर बीजेपी सत्ता में आने में सफल हुए हैं वो मौजूदा सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों से काफी नाराज़ हैं ।

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