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क्या ज़ीका वायरस से डरना जरुरी ?

ज़ीका वायरस के २२ टेस्ट जयपुर में पॉजिटिव पाए गए हैं और देश के अन्य राज्यों में भी इस वायरस के लिए अलर्ट जारी किये जा रहे हैं ।

मंगलवार 9 अक्टूबर 2018, जयपुर में 22 केस ऐसे पाए गए हैं जिनमे ज़ीका वायरस के होने के टेस्ट पॉजिटिव निकले हैं । ज़ीका वायरस अफ्रीका के ज़ीका जंगलों में 1947 में सबसे पहले अस्तित्व में आया था । ज़ीका के में इसके पाए जाने के कारन ही इस वायरस को ज़ीका वायरस नाम दिया गया था ।

ज़ीका वायरस का संक्रमण मच्छरों के द्वारा होता है और एडिस फैमिली के मच्छर इसे फैलने के उत्तरदाई होते हैं । यह मच्छर दिन के समय में सक्रिय होते हैं और इनके कटाने और संक्रमण के बाद लगभग 7 से 14 दिनों में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं या नहीं भी पाए जाते ।

ज़ीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति की ऑंखें लाल, जोड़ो में दर्द, सर भरी लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं कुछ केस में कोई भी लक्षण नहीं मिलते । ज़ीका वायरस लगभग 7 दिनों या इससे अधिक दिनों तक सक्रिय रहता है और शरीर पर अपना अधिकार बनाये रखता है ।  पेरासिटामोलकी टेबलेट का उपयोग दर्द को कम करने की लिए किया जा सकता है ।

 

इस वायरस के संक्रमण से कोई जानलेवा बीमारी नहीं होती किन्तु कुछ केस में यह गंभीर रूप भी ले सकता है । गर्भवती महिलाओं के पेट में पल रहे बच्चे को इस वायरस से काफी हद तक नुकसान पहुंच सकता है और यहाँ तक किसी अर्धविकसित अंग के साथ पैदा हो सकता है ।

सेक्स भी इस वायरस के संक्रमण का जरिया है और यदि इन्फेक्टेड ( संक्रमित ) परुष या महिला के साथ सेक्स किया जाये तो ज़ीका वायरस का संक्रमण हो सकता है । यह वायरस कोई गंभीर लक्षण नहीं उत्पन्न करता और इसके द्वारा बीमारी का इलाज ज्यादा से ज्यादा बीएड रेस्ट और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए तरल पदार्थों का सेवन है ।मरीज़ के शरीर में अपनी सक्रियता का समय पूरा होने के पश्चात इस वायरस से स्वतः ही छुटकारा मिल जाता है ।

दिन में भी मच्छरों से बचने के लिए वो सभी उपाय करने चाहिए जो की रात के वक़्त सोने के लिए किया जाता है और ज्यादा से ज्यादा आस पास साफ सफाई रखनी चाहिए जिससे मच्छरों के पैदा होने का खतरा ज्यादा से ज्यादा कम हो सके । मच्छरों के लार्वा को बढ़ने से रोकने के लिए दवा का समय समय पर छिड़काव भी इस वायरस को फैलने के खतरे को कम कर सकता है ।

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2 comments

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